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राहु पांचवां भाव में

Putra Bhavसंतान, बुद्धि, प्रेम

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राहु पांचवां भाव में

शुभ फल

जातक दयालु, तीक्ष्णबुद्धि व किंचित अभिमानी होता है। वह लेखन कार्य से संबंधित कार्य करता है। राजसंबंध से उत्तम फल होता है। उसे पुत्र लाभ होता है, चाहे देरी से ही क्यों न हो। पर पुत्रियां जल्दी हो जाती हैं। नाग देवता की पूजा से संतान सुख उत्तम रहता है।

अशुभ फल

जातक भाग्यहीन, मूर्ख, डरपोक व निर्धन होता है। गंदा रहता है। नीच लोगों की संगति में रहता है। उसके आनंद और विलास में बाधाएं आती हैं और मानहानि सहनी पड़ती है। राजकोष से दंड भोगता है। उसे कलेजे या उदर का रोग होता है। बीमारी पर फिजूल खर्चा होता है। उसकी पत्नी भी पेट के रोगों से पीड़ित रहती है या उसका मासिक धर्म ठीक नहीं चलता। जातक को पुत्र सुख नहीं होता या जन्म समय पर भी रुकावट या पत्नी को काफी तकलीफ होती है।

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