Jyotish Zone

वृषभ राशि

क्रम
2
तत्व
पृथ्वी
स्वामी
शुक्र

खगोल परिचय

वृष अर्थात् बैल का वर्णन ॠग्वेद (4/1 तथा 6/56) में पाया जाता है। इस राशि में 44 मुख्य सितारे नंगी आँख से देखे जा सकते हैं। इस राशि में कृत्तिका नक्षत्र का 3/4 भाग, रोहिणी सम्पूर्ण तथा मृगशिरा नक्षत्र का आधा भाग पड़ता है। जिसमें रोहिणी बैल का सिर तथा कृत्तिका उसकी पीठ पर स्थापित है। चीनी और जापानी ज्योतिषियों ने 1054 ईसवी में इस राशि में एक बड़े तारा के विस्फोट (सुपर नोवा) को देखा था।

पौराणिक वर्णन

वृष भगवान् शिव का वाहन (नंदी) है। प्राचीन काल में सभी सभ्यताओं में वृष पूजा चलती थी। ॠग्वेद में भगवान् के एक अवतार वृषाकपि के रूप में उल्लेख मिलता है। मोहनजोदाड़ो की सभ्यता से प्राप्त मुद्राओं पर बड़ी ऊंची पीठ वाले बैल की आकृति दर्शाती है। लिंगायत परम्परा में वृषभ को भगवान् का अवतार माना जाता है। मिश्र में वृष को एक देवी माना जाता था। यूनानी गाथाओं में ओलिम्पस का मुख देवता जुपिटर ने राजकुमारी यूरोपा को उठा लाने के लिए एक बैल का रूप धारण किया था। राजकुमारी यूरोपा को अपनी पीठ पर बिठा लेने पर वह दौड़ कर क्रीट समुद्र में तैरने लगा। यूनानी परम्परा में तभी से वृष का मुख समुद्र से निकला दिखाया जाता है। मिश्र में वृष प्रजनन शक्ति के रूप में पूजा जाता था।

प्रकृति

सफेद रंग वाली इस राशि की आकृति बैल जैसी है। इसका स्वामी शुक्र है, यह चन्द्र की उच्च राशि है। इस राशि में कोई ग्रह नीच नहीं होता। शरीर में मुख से गर्दन एवं निचले जबड़े पर इसका अधिकार है। वात प्रकृति वाली इस राशि का स्वभाव स्वार्थी परन्तु परिश्रमी और सांसारिक कार्यों में होना होता है।

स्थान

यह राशि वन, पर्वत शिखर, गऊशाला, पशुशाला, डेरीफार्म, ग्वालों की बस्ती, चरागाह, कृषि भूमि, जल से भरा खेत, बाग-बगीचा, खुले मैदान में निवास करती है।

वस्तुएं

गाय, बैल, पालतू पशु, चावल, कपास, पुत्री वाला, पुष्प, गेहूँ फसल।

प्रभाव

यदि जन्म या नाम राशि वृष हो तो जातक सुशील, सत्यवादी, परोपकारी, माता-पिता और गुरु का आदर करने वाला, सभा चतुर, शांत चित्त और सहनशील होता है। वह प्राचीन संस्थाओं, मर्यादाओं को मानने वाला, बहुत मित्रों वाला, उदार स्वभाव वाला होता है। खेती, व्यापार से लाभ, अकस्मात धन प्राप्ति करता है। सुखमय अधिकार पूर्ण जीवन व्यतीत करता है, कार्य आदि करने में कभी-कभी आलसी हो जाता है। स्त्रियों का प्रेमी, आज्ञाकारी होता है। मिथुन, कन्या, मकर, कुंभ राशि वाले मनुष्य व्यवहार में उत्तम रहते हैं। कर्क और सिंह राशि वालों से विरोध की संभावना रहती है। अशुभ असर के समय जातक चोर, कर्महीन हो जाता है। शत्रु से छाती पर चोट लगती है।

रोग

नेत्र और गले में कष्ट, खांसी, शीत रोगों आदि से दु:खी, ग्लैंड (ग्रन्थि) के रोगों से ग्रस्त, पशुओं से भयभीत रहता है।

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