वृषभ लग्न
- राशि
- वृषभ
- तत्व
- पृथ्वी
- स्वामी
- शुक्र
वृष लग्न पूर्वी क्षितिज पर जन्म के समय उदित होने वाली राशि है।
शरीर
जातक का शरीर गंदमी रंग का होता है, गर्दन मोटी या छोटी होती है। जांघें मजबूत होती हैं। कंधे ऊंचे उठे हुए तथा बाजू गठे होते हैं। चेहरा गोल लेकिन प्रतिष्ठा का सूचक होता है।
स्वभाव
शांति प्रिय, धीर, कर्मवीर व सहनशील होता है। हठी लेकिन अधिकार का इच्छुक होता है। प्रायः अपने विचार के अनुसार बात करता है। चित्त गंभीर होता है। अपने विचार आसानी से दूसरों को नहीं बतलाता। मीठा बोलने वाला तथा हंसमुख होता है, इसलिए इसके बहुत दोस्त होते हैं।
जीवन
बचपन या यौवन के शुरू में अधिक कठिनाई झेलता है, लेकिन जीवन के मध्य तथा अंत में धन-संपत्ति प्राप्त कर सुख भोगता है।
रोग
प्रायः गले और छाती के रोगों की आशंका रहती है। इसलिए सर्दी से बचाव करना चाहिए। समुचित भोजन करना चाहिए। जल्दी के कामों से सावधान रहें।
भावेश
वृष लग्न के लिए भावेश इस प्रकार होते हैं:
- सूर्य: चतुर्थेश
- चंद्र: तृतीयेश
- मंगल: सप्तमेश तथा द्वादशेश
- बुध: द्वितीयेश तथा पंचमेश
- गुरु: अष्टमेश व एकादशेश
- शुक्र: लग्नेश व षष्ठेश
- शनि: दशमेश व एकादशेश
इनमें शनि राजयोग कारक, बुध विद्याकारक, शुक्र शुभ और चंद्र, मंगल, सूर्य एवं गुरु कष्ट कारक रहते हैं।
वृष लग्न में उत्पन्न विख्यात व्यक्ति
सन्त ज्ञानेश्वर, रानी विक्टोरिया, जगदीश चन्द्र वसु, सर आशुतोष मुखर्जी, लता मंगेशकर, उमर ख्याम, कवि टेनिसन, जार्ज बर्नार्ड, मिस हैलन कीलर।
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