Jyotish Zone

मेष राशि

क्रम
1
तत्व
अग्नि
स्वामी
मंगल

खगोल परिचय

रवि मार्ग की प्रथम राशि मेष है। मेष मंडल में 18 मुख्य तारे देखे जा सकते हैं। इस राशि में अश्विनी मेष पूंछ में और भरणी नक्षत्र सिर पर तथा कृत्तिका प्रथम चरण शामिल है। इस मंडल के उत्तर में तिमि मंडल के सितारे हैं।

पौराणिक वर्णन

यह राशि इन्द्र के नाम पर है जिसने एक बार मेढ़ा का रूप धारण किया था।

त्यम् सुः मेषम् महया स्वः (ॠगवेद 1/52/1)

मत्स्य पुराण के (148/64) मत से इन्द्र ने व्रजांग की पत्नी की तपस्या भंग करने के लिए मेष का रूप धारण किया था। मत्स्य पुराण के (6/33) के अनुसार मेष का जन्म ॠषि कश्यप और ताम्रा से हुआ। मेष राशि में सूर्य के प्रवेश पर अक्षतों का अष्टदल कमल बना कर सूर्य की उपासना की जाती है। इस पूजा से सब प्रकार की वृद्धि होती है। प्राचीन काल में मेष सक्रान्ति का महत्व विषुवत् (दिन रात्रि समान) के कारण था। इस राशि के मुख्य नक्षत्र अश्विनी कुमारों के नाम हैं, जिन्होंने ॠषि दधीचि से मधु विद्या सीखने के लिए पहले उसका सिर घोड़े के सिर से काट डाला। परन्तु बाद में इन्द्र ने क्रोध कर ॠषि का सिर काट डाला, इसी कारण यह नक्षत्र घोड़े जैसा भी दिखाई देता है। लगभग सभी प्राचीन मान्यताओं में मेढ़े को दिव्यता के साथ जोड़ा गया है। अप्सरा उर्वशी को पुरूरवा से लौटा लाने के लिए गंधर्वो ने उसके प्रिय मेढ़ों को चुरा लिया था। अप्सरा के साथ में मेढ़ा आदि शक्ति तथा स्वयम्भू तथा जीवन के स्त्रोत का प्रतीक है।

यूनानी गाथाओं में इस राशि का नाम एरीज़ है जो उड़ सकने की शक्ति रखता है। इस मेढ़े ने बुध के कहने से शीलाजे की रानी के एक पुत्र की रक्षा की थी। इस कृत्य से प्रभावित होकर यूनानी देवताओं के सम्राट ज्यूपिटर ने इस राशि को सर्वप्रथम स्थान दिया। प्राचीन मिश्र परम्परा में मेढ़े को काम शक्ति व जनन शक्ति का प्रतीक माना गया है। उनका एक देवता मेढ़े के सिर वाला है जो कि नील नदी का रक्षक है।

प्रकृति

लाल रंग वाली राशि की आकृति बकरे जैसी होती है। इसका स्वामी मंगल है। सूर्य की यह उच्च तथा शनि की नीच राशि है। शरीर में सिर वाले भाग मस्तिष्क है, ऊपरी जबड़ा तक पर इसका अधिकार रहता है। पित्त प्रकृति वाली इस राशि का स्वभाव साहसी, तथा मित्रों की सहायता करना होता है।

गुणमान
क्रमप्रथम राशि
रंगलाल
आकृतिबकरे जैसी
स्वामीमंगल
उच्च राशिसूर्य
नीच राशिशनि
शारीरिक अधिकारसिर और मस्तिष्क, ऊपरी जबड़े तक
प्रकृतिपित्त

स्थान

यह राशि भेड़, बकरी के घूमने की जगह, जंगल पर्वत, गुफा, अग्नि स्थान, भूगर्भ धातु, रत्न आदि की खाने तथा चोरी की जगह में निवास करती है।

वस्तुएं

भेड़, बकरी, ऊनी वस्त्र, जौ, मसूर, औषधि, सोना आदि इस राशि की वस्तुएं होती है।

राशि फल

यदि जन्म राशि या नाम राशि मेष हो तो जातक, पतले शरीर और लाल नेत्रों वाला होता है। वह धनी, पुत्रवान्, हसमुख, तेजस्वी, देव गुरु भक्त अन्य आहार करने वाला तथा विदेश वास का इच्छुक होता है। सभी कार्यों को शीघ्र निपटाने वाला, अधिकार पूर्ण पद, विशेषकर युद्ध विभाग, सेना, पुलिस या जंगलात का बड़ा अधिकारी होता है ओर राजकीय सम्मान पाता है या किसी स्वतन्त्र व्यवसाय से उन्नति और धन प्राप्त करता है। परोपकारी ऐसा कि चाहे अपने काम में आलस्य हो जाए परन्तु मित्रों का कार्य अवश्य करवा देगा।

कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन राशि वाले मनुष्य इसके लिए लाभदायक होते हैं। इसकी मिथुन और कन्या राशि वालों से प्रायः नहीं बनती।

अशुभ असर के समय जातक चिड़चिड़े स्वभाव का, गंदे नाखुनों वाला होता है। ऊँचे स्थान से गिरने के कारण, दुर्घटना आदि, सिर में चोट लगनी या पीड़ा होती है।

रोग

अज़ीर्ण, उदर रोग, दौरे पड़ना, फोड़े-फुंसी, दाह, नेत्र रोग, अग्नि से भय रहता है।

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