Jyotish Zone

मीन राशि

क्रम
12
तत्व
जल
स्वामी
गुरु

खगोल परिचय

इस राशि में पड़े तारे दो मछली जैसे दीखते हैं जिनके नाम पर यह राशि मीन कहलाती है। इन मछलियों के नाम महामीन व दक्षिणमीन मण्डल हैं। महामीन मण्डल कुंभ के दक्षिण में व मकर के दक्षिण पूर्व में पड़ते हैं। मीन राशि का मुख्य तारा दक्षिणमीन या मत्स्यमुख में पड़ता है जो कि पूर्व में अभिमुख है। इसका मुख्य तारा बहुत बड़ा और चमकदार है, जो कि आसानी से पहचाना जा सकता है। इस राशि में पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का ¼ भाग, उत्तराभाद्रपद व रेवती नक्षत्र का पूरा भाग पड़ता है। इस राशि के एक मुख्य तारे का नाम इन्द्र पुत्री जयन्ती के नाम पर है।

पौराणिक वर्णन

मीन का पौराणिक संबंध विशेष रूप से प्रजापति मनु की प्रलय कथा से जुड़ा है। ॠग्वेद में आकाशगंगा में नाव का वर्णन मिलता है। यथा:

"राजा सिन्धुनाम् अवसिष्ठ वासः ।

ॠतस्य नाव आर अरुहत् रजिष्ठाम्।" (ॠग्वेद 9/89/2)

प्रेम के देवता कामदेव का एक नाम मीन है क्योंकि मीन का चिन्ह उनकी पताका पर बना है, शायद इसी कारण प्रेम का ग्रह शुक्र, मीन राशि में उच्च का होता है। इस राशि के एक मुख्य तारे का नाम इन्द्र पुत्री जयन्ती के नाम पर है।

यूनानी गाथाओं में भी देवी वीनस (शुक्र) तथा उसके पुत्र कयूपिङ (काम) ने एक समय समुद्र में छंलाग लगा दी थी और इन दोनों ने अपने को मछलियों के रूप में बदला था।

प्रकृति

मटमैली रंग वाली इस राशि की आकृति जल में तैरती दो ऐसी मछलियों की भांति है, जिनकी पूंछ एक दूसरे के मुंह में है। इसका स्वामी गुरु है। यह शुक्र की उच्च और बुध की नीच राशि है। शरीर में दोनों पैरों व एड़ी पर इसका अधिकार है। कफ प्रवृत्ति वाली इस राशि का स्वभाव उत्तम व कोमल होता है। यह राशि, देव-भक्ति और अपना सर्वस्व तक दान देने की भावना पैदा करती है।

गुणमान
रंगमटमैला
आकृतिजल में तैरती दो मछलियाँ, पूंछ एक दूसरे के मुंह में
स्वामीगुरु
उच्च राशिशुक्र
नीच राशिबुध
शारीरिक अधिकारदोनों पैर व एड़ी
प्रकृतिकफ

स्थान

यह फूलों वाली जगह, मंदिर, तीर्थ स्थानों, नदी, समुद्र, जल, झील, बांध व द्वीपों में निवास करती है।

वस्तुएं

मछली, समुद्री-रत्न, जल से उत्पन्न समस्त पदार्थ, समुद्री पक्षी।

प्रभाव

यदि जन्म या नाम राशि मीन हो, तो जातक रूपवान, सुंदर दृष्टि वाला, ईमानदार, धनी, मान्य, निष्कपट व सरल स्वभावी होता है। वह लेखक, विद्वान, माता, पिता व देवता की भक्ति करने वाला, अतिथि-स्नेही, सुगन्ध का शौकीन, संगीत प्रिय, संयमी और जितेंद्रिय होता है। शस्त्रविद्या में भी कुशल होता है। अपने शत्रुओं पर विजय पाता है। अज्ञात धन की प्राप्ति करता है, या तरल पदार्थों से लाभ कमाता है। अपनी स्त्री के वशीभूत रहता है।

मेष, कर्क, सिंह व धनु राशि वालों से मित्रता रहती है। वृष, मिथुन, कन्या व तुला राशि वालों से विरोध रहता है।

अशुभ असर के समय जातक मादक द्रव्य का आदी, व्यभिचारी और शराबी हो जाता है। अच्छे कार्यों में जल्दी ही उत्साह खो बैठता है। विलासिता और दुष्टता की ओर झुकाव हो जाता है। जेल जाने का योग बनता है।

रोग

ज्वर, ठंड के रोग, गुप्त रोग, नशीले पदार्थों से पैदा रोग।

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