तुला लग्न
- राशि
- तुला
- तत्व
- वायु
- स्वामी
- शुक्र
तुला लग्न पूर्वी क्षितिज पर जन्म के समय उदित होने वाली राशि है।
शरीर
शरीर लंबा, दुबला और चेहरा सुन्दर होता है। दांत विरले होते हैं। रंग साफ व कुछ-कुछ सांवला होता है। छाती चौड़ी होती है।
स्वभाव
जातक उदार, मिलनसार होता है और दूसरों की मदद को हमेशा तैयार रहता है। विचार और चरित्र अव्यवस्थित होते हैं, लेकिन अंदर से साफ होता है। जातक संगति प्रिय, मेधावी, व्यवहार कुशल और न्यायप्रिय होता है। कोप भी जल्दी करता है और शांत भी जल्दी हो जाता है।
जीवन
जातक के मित्र प्रतिष्ठित होते हैं। ऐसे जातक स्वयं न्यायकर्त्ता होते हैं या वाणिज्य में उन्नति करते हैं। सत्कर्म से जीविका चलाने वाले होते हैं।
रोग
जातक को कमर, गुर्दे व मूत्र संबंधी रोगों की आशंका रहती है। इन अंगों को सर्दी से बचाना चाहिए। शुद्ध जल और वायु का सेवन ऐसे जातक के लिए उपयोगी है।
भावेश
तुला लग्न के लिए भावेश इस प्रकार होते हैं:
- सूर्य: एकादशेश
- चंद्र: दशमेश
- मंगल: द्वितीयेश व सप्तमेश
- बुध: भाग्येश व द्वादशेश
- गुरु: तृतीयेश व षष्ठेश
- शुक्र: लग्नेश
- शनि (राजयोग कारक): चतुर्थेश व पंचमेश
शनि राजयोग कारक होता है। बुध व शुक्र शुभ फल देते हैं। मंगल, सूर्य और गुरु अनिष्टकारी होते हैं। मंगल मारकेश होकर भी मृत्युकारक नहीं होता है।
तुला लग्न में उत्पन्न विख्यात व्यक्ति
गोस्वामी तुलसी दास, बादशाह अकबर, हैदर अली, निजाम हैदराबाद, रमण महर्षि, श्री चैतन्य महाप्रभु, श्री राम शर्मा आचार्य, सीजर, महारानी झांसी, महात्मा गांधी, स्टालिन, हिटलर, महाकवि गेटे, नरसिंह भक्त, जनरल फ्रान्को, चर्चिल, देवानन्द, चन्द्रशेखर वैन्कट रमन, बर्ट्रेंड रसल, लुई पाश्चर।
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